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महात्मा गाँधी जी का छत्तीसगढ़ आगमन - स्वाधीनता संग्राम

महात्मा गाँधी जी का छत्तीसगढ़ आगमन - स्वाधीनता संग्राम


विद्रोहों के साथ-साथ छत्तीसगढ़ के भीतर देश में चल रहे अन्य कई आंदोलनों और सत्याग्रह का प्रभाव भी विशेष रूप से पड़ा था। खास तौर पर तिलक और गांधी जी का प्रभाव छत्तीसगढ़ के आंदोलन में विशेष रूप से रहा है।  

इतिहासकार डॉ. रमेन्द्रनाथ मिश्र कहते हैं कि बताते हैं कि छत्तीसगढ़ में खास तौर पर सन् 1920 में धमतरी का कंडेल नहर-जल सत्याग्रह अहम रहा।

  •  धमतरी जिले के छोटे से गांव कंडेल के किसानों ने अंग्रेजी शासन के तुगलकी फरमान के विरुद्ध जल सत्याग्रह किया था।
  • इस सत्याग्रह से अभिभूत होकर गांधी जी 21 दिसंबर 1920 को धतमरी में किसानों के आंदोलन में शामिल होने पहुँचे थे। सन् 1933 में गांधी जी का दोबारा छत्तीसगढ़ आगमन हुआ था।
  • गांधी जी के आने से छत्तीसगढ़ में चलाए जा रहे आंदोलन को और बल मिला। इसके बाद व्यक्तिगत सत्याग्रहरायपुर का षड़यंत्र कांड और अंग्रेजों भारत छोड़ों आंदोलन प्रदेश में प्रमुखता से चलता रहा।
  •  1942 में जब “अंग्रेजों भारत छोड़ो” आंदोलन का आह्वान किया गया था तब समूचा छत्तीसगढ़ अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफत एक हो गया और देश के आजाद होने तक आंदोलन जारी रहा। 


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